Sunday, October 8, 2017

Valmiki Ashram Turturiya,Lavan,Kasdol- Balodabazar-Chhattisgarh

     तुरतुरिया -महर्षि वाल्मीकि आश्रम व लव - कुश की जन्म भूमी

तुरतुरिया मे वाल्मीकी आश्रम के बाई ओर छोटी छोटी दूकानो  के पास से गुजरते हुवे एक नाला को पार करके मातागढ नामक स्थान पहुचा जाता है। मातागढ उचि पहाडि पर स्थीत है। चारो तरफ विषाल वृक्ष बडे-बडे चट्टानो से घिरा हूवा है। पहूचने के लिये सिढी बनी  हूई है। मातागढ से पहले कुछ टुटी फुटि कुटिया दिखाई देति है जिसमे भगवान राम व बुद्ध कि खन्डीत प्रतिमा है। कहते है। कि यहि पर माता सिता कि कुटिया हूवा करती थी। और निचे महर्षि वालमिकी का आश्रम।
turturiya Valmiki ashram
लव कुश 

मातागढ मंदिर मे माता सिता माता काली कि मूर्तिया विराजमान है। यहा नवरात्री मे मनोकमना ज्योति जलायी जाति हैै। 
Valmiki Ashram Turturiya,Lavan,Kasdol- Balodabazar-Chhattisgarh
तुरतुरिया - गोमुख

यहि पर से झरणे कि कलकल कि ध्वनि सुनाई देति है। झरना जो थोडि आगे पर्वत से निचे पर स्थीत है। उसे पार करके  पर्वत कि उचि चोटि पर एक गुफा है।जिसे सेर गुफा (बघवा माडा) भी कहा जाता है। गुफा काफि विषाल है। ईस गुफा के अंदर 100 लोग आराम से घुस सकते है। यदि उस गुफा पर वर्षा हूई तो किसी पर एक भी बुद जल नहि पडेगि ईतना विषाल गुफा है। इस गुफा मे नवरात्री मे मनोकामना ज्योति जलाई जाति है।
turturiya-shivling
शिवलिंग 

Turturiya in Chhattisgarh
भगवान विष्णु की प्रतिमा 

valmiki in Turturiya
विष्णु प्रतिमा 

प्राचीन शिवलिंग 

mata gad Turturiya
माता गढ़ 

baghwa mada Turturiya
बघवा माडा 

तुरतुरिया एक ऐतिहासिक स्थल है। मगर वह अपनी प्राचिनता व विराषत को खोति नजर आ रहि हैै।
इन्हे भी देखे :-

Kamraud - Siddh Baba Temple - Mahasamund(कमरौद सिद्ध बाबा मंदिर)

कमरौद ग्राम जो बागबाहरा तहसील जिला महासमुंद के अंतरगत आता यहाँ  का सिद्ध बाबा मंदिर आस -पास के लोगो का आस्था का केंद्र बना हुवा वैसे मंदिर तो छोटी है मगर मान्यता बहुत दूर दूर तक फ़ैली हुई है|

Siddh Baba Temple
सिद्ध बाबा मंदिर 


Siddh Baba Temple
सिद्ध बाबा की प्रतिमा 

Kamraud bagbahra
सुन्दर चट्टान 

Kamraud - Chhattisgrh
मंदिर का बाहरी दृष्य 
सिद्ध बाबा का जो डोंगरी है वह बहुत सुन्दर है  बड़े बड़े चट्टान वहा  पर है|  आस पास हरियाली  फैली हुई  है| इस जगह पर देखने से लगता है की काफी एकांत स्थान  है यहा  किसी साधु की तपस्या स्थली रही होगी और शिव जी की आराधना  कि होगी  क्युकी बाबा के प्रतिमा के बगल में  एक शिवलिंग है| जो  काफी प्राचीन मालूम पड़ता  है| यहाँ पर छेरछेरा  के एक दिन बाद मेले का आयोजन ग्रामीणों के द्वारा किया जाता है|जिसमे आस पास के ग्रामीण काफी मात्रा में मेले का आनंद लेने के लिए सहपरिवार पहुंचते है|  कमरौद ग्राम से पहले डोंगरीपाली ग्राम पड़ता है डोंगरीपाली की पहाड़ी पर स्वप्न देवी महामाया का निवास स्थान है|माता गुफा के अंदर निवास करती है | डोंगरीपाली से पहले मामाभांचा ग्राम में मामा भांचा का प्रसिद्ध मंदिर है|