Thursday, February 23, 2017

मुंगई माता मंदिर बावनकेरा ( Mungai Mata Temple,Bawankera,Patewa-Mahasamund-Chhattisgarh )

जिला मुख्यालय से महज 35 कि.मी की दुरी पर और मुख्य राज मार्ग N H 53  पर पटेवा  से  6 कि.मी  की दुरी पर बावनकेरा ग्राम के समीप मुगई  माता का प्रसिद्ध मंदिर है  स्थित है। जो मुख्य मार्ग के बाजु में है।  माता रानी  का मंदिर उची पहाडी  के
Mungai mata,Bawankera,Mahasamund
ऊपर स्थित है माता रानी छोटी गुफा के अंदर विराज माँन है माता के मंदिर के  चारो तरफ से घने जंगलो और  उचे पर्वत से घिरा हुवा है।  वहां का वातावरण काफी रमणीय है जिसमे श्रद्धालु गण  भारी मात्रा में माता के दरबार में आते है । माता की  मोहनी सूरत मन मंदिर में बस जाती है। यहाँ पर रास्ते  में गुजरने वाले यात्री प्रायह माता के दर्शन कर के ही वहा  से  
Mungai mata,Mungae mata Bawankera,Mahasamund
Mungaemata Gufa,Mungae mata Bawankera,Mahasamundप्रस्थान करते है। मुगई माँ  को दुर्गा माता का रूप माना  जाता है।  माता को स्वप्न देवी के रूप में भी पूजा जाता है । इसी कारन यहाँ पर साल के दोनों नवरात्री में   मनोकामना ज्योति जलाई जाती है पूरा नव दिन माता की  सेवा जस गीत से गूंज उठता है जिसमे माता के प्रति अटूट भक्ति को देखि जा सकती है ।
नवरात्रि में सप्तमी ,आठे,नवमी को भारी भीड़ देखि जा सकती है।  
यहाँ पर पर्वत के ऊपर चढ़कर आस पास के नजारो  को देखने का अलग ही अनुभव होता है चारो तरफ हरियाली ही नजर आती है

Mungaemata mandir



Mungaemata mahasamund





मंदिर की रूप रेखा - सबसे पहले माता का प्रवेश द्वार मिलता है|  उसके बाद निचे वाली माता के भव्य दर्शन होते है|  उसके बाद आगे जाने पर भोले बाबा के अर्ध नारिस्वर स्वरुप  के दर्शन होते है उसके आस पास अनेक छोटे -छोटे मंदिर बनी  हुई है उसके बाद फिर आगे पर्वत पर चढाई करने पर माता के दर्शन एक छोटी गुफा के अंदर होता है यही पर ज्योति कक्ष के समीप एक खौफनाक  गुफा मिलता है जिसमे जंगली जानवर होने के सबुद  मिलते है उस विशाल पर्वत पर दो हनुमान जी की प्रतिमा माता के  रक्षक के रूप में तत्पर दिखाई पड़ता है माता के मंदिर के सामने एक शेर माता के रक्षक के रूप में बनाया गया है फिर उसे रास्ते  पर पहाड़ की चोटी  पर माता मुगेशसबरी  माता का मंदिर स्थापित है

विशेष :- अब यहाँ पर  घुंचापाली चण्डी के सामान   शाम होते ही माता के दरबार में प्रसाद लेने के लिए भालू आते है। जिसे भक्त जन भालू को नारियल ,प्रसाद ,आदि अपने हातो  से खीलाते है । इस ग्राम में उर्फ़ का त्यौहार बड़ी धूम -धाम से  मनाया जाता है जिसमे मेले का आयोजन होता है । जिसमे सभी धर्म के लोग इसमें सामिल होते है । यहाँ के लोगो में  एकता और  भाई चारे की भावना सहज ही देखने को मिलती है ।  

 सुचना:- मंदिर समिति ने यहाँ पर एक सूचना लगाया है की संध्या होने पर पहाड़ी के ऊपर ना चडे भालू  का आना जाना बना रहता है वहा  पर कुछ भी अप्रिय घटना होने की चेतावनी दी गई है हमें उनके आदेश का पालन करना चाइये  और  जंगली जानवर से दुरी बनाये   रहना चाइये ।    


इसी मुख्य राज मार्ग से  पिथौरा की कामख्या मंदिर ,सरायपाली का सिगोड़ा रूद्रेश्वरी मंदिर जाते है। 

5 comments:

  1. A great place to find religious and natural peace. Bears come here occasionally in the evening (basically 6pm). It is developing and turning to be a more beautiful place to visit. The best thing is: it is situated on NH53, so it is very easy to reach here

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  2. This temple is situated on highway NH 53.
    80 km from Raipur towards sambalpur.
    Very nice place for visits. This temple is on hill top approx 70 meter hight  
    Jai Mungai Maa


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  3. If you're lucky, you might see wild bear's visiting the temple and eating food directly from your hand

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  4. Maa ki leela aprampar hai. Jai mata rani.

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